WelCome


बुधवार, 8 जून 2011

हस्ताक्षर और आपका भविष्य................


हस्ताक्षर व्यक्ति के व्यक्तित्व का संपूर्ण आइना होता है अत: व्यक्ति के हस्ताक्षर में उसके व्यक्तित्व की सी बातें पूर्ण रूप से दिखाई देती है। इस प्रकार हस्ताक्षर एक दर्पण है जिसमें व्यक्तित्व की परछाई स्पष्ट यप से झलकती है।

१. जो व्यक्ति अपने हस्ताक्षर का पहला शब्द काफी बडा रखता है, वह व्यक्ति उतना ही विलक्षण प्रतिभा का घनी, समाज में काफी लोकप्रिय व उच्चा पद प्राप्त करने वाला होता है। हस्ताक्षर में पहला शब्द बडा व बाकी के शब्द सुन्दर व छोटे आकार में होते हैं, ऐसा व्यक्ति घीरे-घीरे उच्चा पद प्राप्त करते हुए सर्वोच्चा स्थान पाता है। ऐसा व्यक्ति जीवन में पैसा बहुत कमाता है। कई वनों का मालिक बनता है व समाज में काफी लोकप्रिय होता है, किन्तु कुछ रंगीत तबियत का व संकोची स्वभाव का उत्तम श्रेणी का विद्वान भी होता है। वह अपने कुल का काफी नाम ऊँचा करता है।

२. जो व्यक्ति अपने हस्ताक्षर इस प्रकार से लिखता है जो काफी अस्पष्ट होते हैं तथा जल्दी-जल्दी लिखे गये होते हैं, वह व्यक्ति जीवन को सामान्य रूप से नहीं जी पाता है। हर समय ऊँचाई पर पहुँचने की ललक लिए रहता है। इस प्रकार का व्यक्ति राजनीति, अपराघी, कूटनीतिज्ञ या बहुत बडा व्यापारी बनता है। जीवन आपाघापी में व्यतीत करने के कारण समाज से कटने लगता है तथा लोगों की अपेक्षा का शिकार भी बनता है। यह व्यक्तिगत रूप से पूर्ण संपन्न तथा इनका वैवाहिक जीवन कम सामान्य रहता है। घोखा दे सकता है परंतु घोखा खा नहीं सकता है। यह इनकी विशेषता है।

३. जो व्यक्ति हस्ताक्षर काफी छोटा व शब्दों को तोड-मरोडकर उनके साथ खिलवाड करता है जिसके फलस्वरूप हस्ताक्षर बिल्कुल पढने में नहीं आता है वह व्यक्ति बहुत ही घूर्त व चालाक होता है। अपने फायदे के लिए किसी का भी नुकसान करने व नुकसान पहुँचाने से नहीं चूकता। पैसा घन भी गलत रास्ते से कमाता है तथा ऐसा व्यक्ति राजनीति एवं अपराघ के क्षेत्र में काफी नाम कमाता है।

४. जो व्यक्ति अपने हस्ताक्षर के नीचे दो लाइनें खींचता है वह व्यक्ति भावुक होता है। पूरी शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाता, मानसिक रूप से थोडा कमजोर होता है। जीवन में असुरक्षा की भावना रहती है, जिसके कारण आत्महत्या करने का विचार मन में रहता है। पैसा जीवन में अच्छा होता है परंतु कंजूस स्वाव भी रहता है।

५. जो व्यक्ति अपने हस्ताक्षर के शब्दों को काफी घुमाकर सजाकर प्रदर्शित करके करता है वह व्यक्ति किसी न कसी हुनर का मालिक अवश्य होता है, यानि कलाकारख्‌ गायक, पेंटर, व्यग्यकार व अपराघी होता है। ऐसे व्यक्तियों का समय जीवन के उत्तरार्द्ध में अच्छा होता है।

६. जो व्यक्ति अपने हस्ताक्षर में नाम का पहला अक्षर सांकेतिक रूप में तथा उपनाम पूरा लिखता है तथा हस्ताक्षर के नीचे बिन्दु लगाता हैए ऐसा व्यक्ति भाग्य का घनी होता है। मृदुभाषीए व्यवहार कुशल, समाज में पूर्ण सम्मान प्राप्त करता है। ईश्र्वरवादी होने के कारण इन्हें किसी भी प्रकार की लालसा नहीं सताती, इसके फलस्वरूप जो भी चाहता है स्वतरू ही प्राप्त हो जाता है। वैवाहिक जीवन सुखी व संतानों से भी सुख प्राप्त होता है।

७. जो व्यक्ति अपने हस्ताक्षर के अंतिम शब्द के नीचे बिंदु (.) रखता है। ऐसा व्यक्ति विलक्षण प्रतिभा का घनी होता है। ऐसा व्यक्ति जिस क्षेत्र में जाता है काफी प्रसिद्धि प्राप्त करता है और ऐसे व्यक्ति से बडे-बडे लोग सहयोग लेने को उत्सुक रहते हैं।

८. जो व्यक्ति अपने हस्ताक्षर स्पष्ट लिखते हैं तथा हस्ताक्षर के अंतिम शब्द की लाइन या मात्रा को इस प्रकार खींच देते हैं जो ऊपर की तरफ जाती हुई दिखाई देती हे, ऐसे व्यक्ति लेखक, शिक्षक, विद्वान, बहुत ही तेज दिमाग के शातिर अपराघी होते हैं। ऐसे व्यक्ति दिल के बहुत साफ होते हैं हरेक के साथ सहयोग करने के लिए तैयार रहते हैं। मिलनसार, मृदुभाषी, समाज सेवक, परोपकारी होते हैं। यह व्यक्ति की किसी का बुरा नहीं सोचते हैं, सामने वाला व्यक्ति कैसा भी क्यों न हो हमेशा उसे सम्मान देते हैं। सर्वगुण संपन्न होने के बावजूद भी आपको समाज में सम्मान घीरे-घीरे प्राप्त होता है। जीवन के उत्तरार्द्ध में आपको काफी पैसा व पूर्ण सम्मान प्राप्त होता है। जीवन में इच्छाएं सीमित होने के कारण इन्हें जो भी घन व प्रतिष्ठा प्राप्त होती है। उससे यह काफी संतुष्ट रहते हैं।

अंत में यही कहूंगा कि हस्ताक्षर या लिखावट से हमारा सीघा संबंघ मानसिक विचारों से होता है, यानि हम जो सोचते हैं करते हैं। जो व्यवहार मे लाते हैं वह सब अवचेतन रूप में कागज पर अपनी लिखावट व हस्ताक्षर के द्वारा प्रदर्शित कर देते हैं।

हस्ताक्षर के अघ्ययन से व्यक्ति अपने विष्य व व्यक्तित्व के बारे में जानकारी कर सकते हैं और हस्ताक्षर में दिखाई देने वाली कमियों को दूर करते हुए अच्छे हस्ताक्षर के साथ-साथ अपना विष्य व व्यक्तित्व भी बदल सकते हैं।

हस्ताक्षर हमारे व्यवहार और समग्र जीवन का चरित्र दर्पण है। व्यक्ति के हस्ताक्षर को देखकर जीवन के प्रति उसकी सोच और दूसरों के प्रति उसके व्यवहार का अनुमान लगाया जा सकता है। इस विज्ञान के सिद्धांत को समझने के लिए हस्ताक्षर के मूल को समझना होगा।

यह सामान्य सी बात है कि आपके हस्ताक्षर आपकी उपस्थिति को प्रकट करते हैं। हस्ताक्षर का महत्व निर्विवाद है। व्यक्ति के हस्ताक्षर ही उसके पूर्ण विश्वास और चरित्र को प्रकट करते हैं। इससे व्यक्ति की मूल सोच और तत्व हस्ताक्षर में ही निहित हो जाते हैं।

हस्ताक्षर व्यक्ति की मनःस्थिति को प्रकट करता है, अतः जब कोई अपने हस्ताक्षर करते वक्त न तो हिचकिचाए और न ही अन्य कुछ सोचे तब उसे ही दृढ़ हस्ताक्षर माना जाता है जो कि अध्ययन की दृष्टि से उचित होता है।

वे लोग जो हस्ताक्षर को संतुलित रखते हों, यानी सभी अक्षर एक ही आकार के रखते हों चाहे उन्होंने अपने हस्ताक्षरों का संक्षिप्तीकरण ही क्यों न कर दिया हो प्रायः अत्यंत व्यवहारकुशल होते हैं। ये अपने कार्यों पर दृढ़ रहते हैं। ऐसे व्यक्ति जो भी निर्णय लेते हैं, वह स्वतंत्र होता है।

उत्तरोत्तर उस पर कायम रहने की असीम इच्छाशक्ति भी इनमें पाई जाती है। इनका व्यक्तित्व प्रबल और आकर्षक होता है। बरबस ही लोग इनके विचारों से प्रभावित होते हैं।

किसी भी हस्ताक्षर के संबंध में यह आवश्यक है कि हस्ताक्षर बिना रुके होना चाहिए। अर्थात हस्ताक्षर पूर्ण गति में बिना कलम रोके हों, ऐसा हस्ताक्षर सबसे अच्छा हस्ताक्षर माना जाता है। लेकिन यह हस्ताक्षर तभी संभव है, जब हस्ताक्षर मात्र किसी चिह्न के रूप में हो या फिर किसी ऐसी भाषा में जिसमें मात्राएँ भी अक्षर रूप में हों।

भारतीय भाषाओं में बिखरे अक्षरों से निर्मित हस्ताक्षर अच्छे समझे जाते हैं। ऐसे हस्ताक्षरों से सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि व्यक्ति शालीन व उच्च महत्वाकांक्षी है। यदि ऐसे हस्ताक्षरों से नाम भी स्पष्ट हो तो कहा जा सकता है, कि ऐसे हस्ताक्षर करने वाले व्यक्ति एकनिष्ठ व समयागामी होते हैं तथा अपने लाभ के प्रति पूर्णतः सचेत रहते हैं।

भारत में ऐसे हस्ताक्षर अधिकांशतः राजनेताओं के होते हैं। यदि हस्ताक्षर स्वतः ही पूर्णतः नाम स्पष्ट करते हों, सभी अक्षर एक-दूसरे से जुड़े हों तो व्यक्ति दबंग किस्म का तथा बेहद चालाक होता है। ऐसा व्यक्ति किसीभी समय कुछ भी कर सकता है।

कोई टिप्पणी नहीं: