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शनिवार, 11 जून 2011

गंगा दशहरा को, गंगा पूजन से पाएं हर सुख


हिंदू संस्कृति में गंगा को सबसे पवित्र व पापों का नाश करने वाली नदी कहा गया है। धर्म ग्रंथों के अनुसार गंगा देवनदी है जो मनुष्य के कल्याण के लिए धरती पर आई है। धरती पर गंगा का अवतरण ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी को हुआ था इसीलिए इस तिथि को गंगा दशहरा या गंगा दशमी के नाम से जाना जाता है-
यह पर्व भारतीय संस्कृति के गौरव का प्रतीक है। इस दिन अनेक स्थानों व प्रमुख तीर्थों पर धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं तथा गंगा के महत्व का वर्णन किया जाता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार जो व्यक्ति इस दिन विधि-विधान पूर्वक गंगा स्नान व पूजन करता है उसी हर मनोकामना तो पूरी होती ही है साथ ही उसे मोक्ष भी प्राप्त होता है। गंगा दशहरा के दिन गंगा पूजन की विधि इस प्रकार है-

संकल्प पूर्वक गंगा में या अन्य किसी पवित्र नदी में दस बार डुबकी लगाएं व साफ वस्त्र पहनकर पितृ तर्पण करें। फिर उस तीर्थ की पूजा करके घी से चुपड़े हुए दस मुट्ठी काले तिल हाथ में लेकर जल में डाल दें। इसी तरह गुड़ से बने दस सत्तू के लड्डू भी जल में डाल दें। इसके बाद तांबे या मिट्टी के घड़े पर रखी सोने, चांदी अथवा मिट्टी से बनी गंगाजी की प्रतिमा का पूजन नीचे लिखे मंत्र के साथ करें-

नमो भगवत्यै दशपापहरायै गंगायै नारायण्यै रेवत्यै।

शिवायै अमृतायै विश्वरूपिण्यै नन्दिन्यै ते नमो नम:।।

इसके बाद भगवान नारायण, शिव, ब्रह्मा, सूर्य, राजा भगीरथ व हिमालय को वहां उपस्थित जानकर उनका भी पंचोपचार पूजन करें।

पूजन में जो सामग्री उपयोग में ले उनकी संख्या दस होनी चाहिए जैसे दस तरह के फूल, दशांग धूप, दस दीपक, दस प्रकार के नैवेद्य, दस पान व दस फल होने चाहिए। दक्षिणा भी दस ब्राह्मणों को दें किंतु उन्हें दान में दिए जाने वाले जौ व तिल सोलह-सोलह मुट्ठी होना चाहिए। इस दिन सोने अथवा चांदी के मछली, कछुए और मेंढ़क बनाकर उनकी पूजा कर नदी में डालने की भी विधान है। अगर सोने-चांदी के नहीं बनवा पाएं तो आटे के भी बनाए जा सकते हैं। पूजा के बाद दीपक नदी में प्रवाहित कर दें।


दशमी शुक्लपक्षे तु ज्येष्ठमासे बुधेहनि।

अवतीर्णा यत: स्वर्गाद्धसतक्र्षे च सरिद्वरा।।

गंगा तट पर इस दिन भव्य रूप से सांस्कृतिक व धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस बार यह उत्सव 11 जून, शनिवार को है। ज्येष्ठ शुक्ल दशमी संवत्सर का मुख कही जाती है। इस दिन गंगा स्नान व दान का विशेष महत्व है-

ज्येष्ठस्य शुक्लादशमी संवत्सरमुखा स्मृता।

तस्यां स्नानं प्रकुर्वीत दानं चैव विशेषत:।।

इस दिन गंगा स्नान व पूजन से दस प्रकार के पापों (तीन कायिक, चार वाचिक व तीन मानसिक) का नाश होता है इसीलिए इसे दशहरा कहते हैं-

ज्येष्ठे मासि सिते पक्षे दशमी हस्तसंयुता।

हरते दश पापानि तस्माद् दशहरा स्मृता।।

(ब्रह्मपुराण)

वैसे तो गंगा तट पर हर दिन एक उत्सव की तरह ही होता है लेकिन गंगा दशहरा पर्व पर आयोजित कार्यक्रम हिंदू सभ्यता में गंगा के महत्व का आभास दिलाते हैं। इस दिन गंगा तटों पर बड़ी संख्या में धर्मालुजन गंगा स्नान व पूजन के लिए आते हैं और स्वयं को धन्य महसूस करते हैं।

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