WelCome


शनिवार, 22 सितंबर 2012

न घर का रखा और न अपना बनाया


तेरी प्रीत ने हमको क्या दिखाया,
 बदनाम कर के जगत में हंसाया
लबों से लगा बांसुरी जब बुलाया,  
 अदाओं भरी टेढ़ी चितवन जो देखी
दिल--जान लुटा जब ज़रा मुस्कुराया
 सुना भोली भाली वो प्रीती की बातें
कहा चल दिए जाने क्या दिल में आया, 
 तेरी खोज में जिस्म --जान राह भूली
पत्ता पत्ता में ढूंडा पता कुछ पाया,  
सब रिश्ते दिल--जान तेरे हाथ बेचे
बहुत कुछ गवाया कुछ हाथ आया, 
मजा खूब ये श्याम वह तेरी उल्फत
घर का रखा और अपना बनाया

कोई टिप्पणी नहीं: