
वैसे तो आज ऐसा कोई नहीं है जिसे लक्ष्मी यानि धन की आवश्यकता ना हो। अधिकांश लोग धन यानि लक्ष्मी के पीछे ही भाग रहे हैं। भगवान विष्णु की अद्र्धांगिनी महालक्ष्मी का वाहन उल्लू है। उल्लू मूर्खता का प्रतिक है। मूर्ख उल्लू ही क्यों है महालक्ष्मी का वाहन?
महालक्ष्मी के वाहन उल्लू से यही स्पष्ट होता है कि बिना सोचे-समझे, अधर्म के कुमार्ग पर चलते हुए जब कोई अनावश्यक धन एकत्र करता है, सबकुछ भुलाकर धन के पीछे भागता है तो उसकी हालत उल्लू के जैसी हो जाती है। अत: धन सदैव धर्म के मार्ग पर चलते हुए ही अर्जित करना चाहिए।
जब कोई अधर्म के मार्ग पर चलते हुए धन अर्जित करता है तो उसके पास लक्ष्मी उल्लू पर बैठकर अस्थाई रूप से ही आती है और वैसा धन अनावश्यक कार्यों में खर्च हो जाता है। परंतु सद्ज्ञान और धर्म के मार्ग पर कार्य करते हुए जो धन अर्जन किया जाता है वह धन स्थाई, उन्नति और समृद्धि लेकर आता है। क्योंकि सद्ज्ञान से धार्मिक कार्य करने पर महालक्ष्मी धर्म प्रतिक और अधर्म के शत्रु भगवान विष्णु के साथ गरुड़ पर बैठकर आती है। इस वजह से ऐसा धन सदैव सुख और समृद्धि देने वाला होता है।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें